भगवान रविदास

 

 

भगवान रविदास समाज के आद्य दैवत, कुलगुरु, आदर्श प्रेरणाश्रोत है.ऐसे दैदिप्यमान महापुरुष का जन्म हमारे समाज मे हुआ, यह समाज के लिये गौरव की बात है. उन्होने पुर्वजो के गौरवशाली इतिहास को पुनर्जिवित किया.उनका जन्म विक्रम संवत १४३३ ई.सन.१३७७ माघ पुर्णिमा,दिन रविवार उत्तरप्रदेश काशी बनारस के पास सिरगोवर्धनपुर गाव मे हुआ.

 

दादाजी :- कालुरामजी
दादीजी :- लखपतीदेवीजी
माताजी :- कलसीदेवीजी
पिताजी :- सन्तोखदासजी
पत्नी :- लोना देवीजी
पुत्र​ :- विजयदासजी

 

भगवान रविदासजी का खानदानी चमडे का व्यवसाय था. जिस मे राजाओ – महाराजाओ ,मुगल बादशहाओ के सैनिको के लिये उपयुक्त चमडे के सामान बनते थे. उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी.

 

उनका जन्म भारत का मध्ययुगीन काल मे हुआ. उस समय समाज मे अन्धश्रद्धा, वर्णभेद, जातिभेद्, छुआछुत का बोलबाला था, वर्णबाह्य, अछूत होने के कारण उनको विद्यालय गुरुकुल मे शिक्षा नही मिली. परंतु भगवान रविदासजी ने साधु, सन्तो की सेवा,संगत,चिन्तन​, मनन, तपद्वारा ज्ञान प्राप्त किये.

 

उनको वेद ,पुराण, उपनिषद, भागवत गीता आदी सभी विषयो का ज्ञान था.यह उनकी वाणी से ज्ञात होता है. अनुभव,ज्ञान के साथ ही, हर लिपी का ज्ञान उनकी वाणी मे प्रदर्शित होता है. गुरुमुखी लिपी उनकी देन है.

 

उनकी सुविद्य पत्नी लोना देवी. लोनादेवी का अर्थ ही रुपवती, सौदर्यवती है. वह भी अध्यात्मिक प्रवृत्ती की थी. उन्हे जडी बुटीयो की जानकारी थी.गाव गाव जाकर असहाय गरीबो की सेवा करती थी.इस प्रकार समाज कार्य मे वह पती का भरपूर सहयोग करती थी. वे आदर्श पती पत्नी के रूप मे समाज मे प्रसिद्ध हो गये.महिलाए उन्हे साक्षात देवी मानती है. अपने बच्चो की बला दूर करने के लिए “दोहाई लोना माई की छू” ऐसा कहते हुए नजर उतारती है.

 

 

समाज मे अन्धश्रद्धा, वर्णभेद, जातिभेद्, छुआछुत के कारण लोगो पर घोर अन्याय होते थे, ज़िसके कारण लोगो की हालत दयनीय थी. भगवान रविदास ने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष छेड दिया, समाज मे फैली अंधश्रद्धा, वर्णभेद, जातिभेद्, छुआछुत को दूर करने के लिए सत्संग, भजन से लोगो को जागरुक करने लगे. समाज को एकसूत्र में बाधने का प्रयत्न किया. सामाजिक क्रांती का आन्दोलन पुरे भारत मे फैल गया. इस आध्यात्मिक क्रांती से धर्म के नाम पर होनेवाले अत्याचार कम होने लगे, लोग सुखमय जीवन जीने लगे.

 

कई युग आए, कई युग गए, घोर उपेक्षा के बावजूद ​काल के पत्थर पर लिखा हुआ भगवान रविदास का नाम अमर हो गया है. उन्होने सिद्ध किया कि व्यक्ती को महानता सत्कर्म से ही प्राप्त होती है. समाज जातीय हीनता से आत्मग्लानी महसूस करता था. उन्होने जातियो का गौरवशाली इतिहास बताकर समाज में आत्मगौरव का भाव जागृत किया.

 

विक्रम सन्वत १५८४, ई.सन १५२८ बनारस मे वे ज्योति ज्योति में समा गये. पुर्वजो का स्मरण, गहन चिन्तन, साधना, शारिरिक व मानसिक सक्रियता उनके १५१ वर्ष के जीवन की विशेषता है.

 

 

BRCF बी.आर.सी.एफ. की आवश्यकता क्यों ?

 

आज देश मे चमार समाज के बहुत सारे संगठन है. वे अपनी क्षमता, भौगोलिक स्वरूप के अनुसार अच्छी तरह कार्य कर रहे है. जिस तरह से वे समाज की प्रगति, उत्कर्ष के लिये प्रयत्नशील, प्रतिबद्ध है. उनके प्रति आदरभाव बढ जाता है. ऐसे संगठन के पदाधिकारियो, सदस्यो के प्रती मन मे प्रेम सम्मान है. कार्यरत संगठन गाव, तहसील, जिला व राज्यस्तरीय है.चमार समाज देशव्यापी है, राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत, शक्तिशाली संगठन द्वारा ही राष्ट्रव्यापी कार्य सम्भव है, देश मे चमार समाज की हजारो जतिया है. उनके बीच भाईचारा, एकता और सामाजिक ताकत निर्माण करने के लिये BRCF का गठन हुआ है. इसे महासागर जैसा शक्तिशाली बनाने के लिये सभी के सहयोग की जरुरत है.

 

 

चमार समाज – इतिहास और वर्तमान

 

सिन्धुघाटी सभ्यता हमारे पुर्वजो की भव्यता को प्रदर्शित करती है. उसके इतिहास मे ही हमारी सच्ची जडे है,धरोहर है. जैसे पौधा जडो से कटकर जिन्दा नही रह सकता, लेकिन जडो से जुडा होनेपर बडे से बडे तुफ़ान का भी मुकाबला कर सकता है. वैसे ही हमे सिन्धुघाटी सभ्यता, यह हमारी गौरवशाली जडे है, इन जडो से हमे जुडना पडेगा.

 

आज देश मे लगभग ६००० जतिया है, ३७४३ ओबीसी, ११०८ अनुसुचित जाती व ७४४ अनुसुचित जनजाती, उनमे उॅच-नीच के भाव है. इसलिये वे साथ नही आते,एकसंघ न होने के कारण अपनी समस्या का हल नही कर पाते है. BRCF उनके बीच भाईचारा, एकता और सामाजिक ताकत
निर्माण करने के लिये प्रतिबद्ध है.

 

देशभर के सभी, लगभग ६ लाख गांवो मे समाज के लोग रहते है, बसे हुये है. उनकी आबादी लगभग २० करोड के आसपास है. पुराने व्यवसाय मरे हुये जानवर की चमडी से सम्बन्धित कार्य करना था. अब खेती से लेकर हर छोटा मोटा कार्य समाज के लोग करते है. पढ लिख कर बडे पदो पर आशीन है. फिर भी सामाजिक रुप से बिखराव और समस्याग्रस्त है.सामाजिक असुरक्षितता महसुस करते है.

 

 

चमार समाज – विशेषता

 

ज्ञानी ,साहसी व अन्याय के विरुद्ध लडते रहना चमार समाज की विशेषता है. इसके बहुत से प्रमाण इतिहास मे मिलते है. सतनामी विद्रोह, चमार रेजिमेन्ट ऐसी अनेक ऐतिहासीक घटनाये हमारे महापुरुषो के आन्दोलन के उदाहरण है. यही विरता के साक्ष है. यह फटे चमडे के साथ साथ लोगो के मन को भी जोडता है. पर आज समाज बिखरा हुआ दिखता है. समाज मेसे ‘’स”’ अलग हो गया अब ‘’माज’’ ही बचा हुआ है. लोगो मे सहिष्णुता, सदाचरण, समझदारी, सह्कारिता, सदभावना, भाईचारा इन मुलभुत तत्वो की कमी साफ़ दिखाई देती है.हमे हमारी खाशियत ध्यान मे रखकर कार्य करना है और समाज को एकसंघ बनाना है.

 

 

BRCF बी.आर.सी.एफ. – उद्देश्य

 

भगवान रविदास ने अपने शिष्य राजाओ को सुराज्य के बारे मे समझाते हुये कहा था,

 

“ऐसा चाहू राज मै, जहा मिलै सबन को अन्न​,

छोट बडो सब सम बसै, रविदास रहै प्रसन्न”

 

इसी प्रकार उन्होने शहर की संकल्पना करते हुए कहा 

 

“बेगमपुरा शहर को नाऊ,

दुख अन्दोहु नहि तिहु ठाऊ”

 

इससे स्पष्ट मालुम होता है कि,समाज में समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय ब्यवस्था प्रस्थापित करना ही उनका सपना था. BRCF समाज मे भगवान रविदासजी को अपेक्षित जीवनशैली,उनके सपनो का भारत प्रतिस्थापित करने के लिये प्रतिबद्ध है. सशक्त राष्ट्रनिर्माण BRCF का उद्देश्य है.

 

 

निर्धारित उद्देश्य पुर्ती के लिये कार्ययोजना

 

1. भगवान रविदास अमृतवाणी का प्रचार प्रसार करने के लिये विविध
सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करना, साहित्य उपलब्ध करना.

 

2. देशभर की सभी चमार जातियो को एकसंघ कर बंधुभाव प्रस्थापित
और देशव्यापी ताकत निर्माण करना.

 

3. समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय पर आधारित ब्यवस्था स्थापित
करना.समाज को दिशा देना और नेतृत्व निर्माण करना.

 

 

4. अंधश्रद्धा, अज्ञान, कर्मकांड, नशा की आदतो को दूर करने के लिये
विविध कार्यक्रम का आयोजन करना.

 

5. अन्याय के विरुद्ध आवाज बुलन्द करने के लिये प्रचार प्रसार के
माध्यम तैयार करना.

 

6. विद्यार्थियो के लिये कार्यक्रमो का नियोजन करना, युवको को मानसिक
रुप से बलवान बनाना.

 

7. महिलायो को ससक्त व जागरुक बनाना.

 

8. देश की आर्थिक योजनाओ की जानकारी देना और
उनके लाभ समाज तक पाहुचाना.

 

9. समाज को बुद्धि, समय और साधन देने के लिये लोगो को तैयार
करना.

 

10. समाज के लोगो का मानसिक बल बढाना.

 

 

समाज के बुद्धिजिवी लोगो की जिम्मेदारी “भगवान रविदास के सपनो का भारत निर्माण करना.” यह BRCF का अंतिम उद्देश्य है. BRCF एक विजन है,एक मिशन है. BRCF का उद्देश सफल करने के लिये हजारो, लाखो, करोडो लोगो के सहकार्य की जरुरत है.अपनी मानसिकता बदलने, सामाजिक एकता व शक्ति का निर्माण करने के लिये भगवान रविदास अमृतवाणी का प्रचार प्रसार और उन्हे आचरण में लाने की आवश्यकता है.

 

भटके हुये लोगो को सही दिशा बताने, उनके बुद्धिविवेक को जागृत करने की जरुरत है. आनेवाली पिढियो को अधिक मजबूत बनाने का निरंतर प्रयास करने की जरुरत है. समाज के बुद्धिजीविओ चिंतन करो,संगठीत बनो, संघर्ष करो और आनेवाली पीढी को वैचारिक, आर्थिक, सामाजिक मजबुती दो.इससे ही भगवान रविदास को अपेक्षित भारत का निर्माण होगा.भारत महान होगा.

 

 

इतिहास खुद को दोहराता है.सिंधू घाटी लोगो को अपना गौरवशाली इतिहास दोहराने का अवसर मिला है. प्रेम,सौहार्द से परिपूर्ण लोकतांत्रिक समाज व्यवस्था भारतीय संविधान द्वारा प्रस्थापित हुई है.जिसने हर मनुष्य को आगे बढने का अवसर है.मानव मुल्यो का सम्मान है. सिंधू घाटी सभ्यताही हमारा बेगमपुरा है.इस सभ्यता को पुन:स्थापित करना हि बुध्दिजीवियो की महान जिम्मेदारी है.अचेत स्वनिती, मजबूत सोच, राष्ट्रव्यापी सामाजिक संगठन आवश्यक है.इसके लिये हर व्यक्ती का समर्थन, सुयोग्य दिशा, अनुकूल गती,सामुहिक लक्ष,सामुहिक प्रयास करने से समाज को सफलता हि मिलेगी. भगवान रविदास के सपनो का भारत निर्माण होगा. समाज का गौरवशाली इतिहास है, उसके नाम, निशाण, धर्मग्रंथ, राष्ट्रव्यापी सामाजिक संगठन से ही एकता, बंधुता बढेगी और निरंतर विकास होगा. BRCF इसके लिये कटिबध्द है.

 

 

अत: सभी से अनुरोध है की, समाज विकास के लिये अपनी बुद्धी,समय,संसाधन देकर BRCF के कारवां को आगे ले जाने में अपनी महती भुमिका निभाये.

 

……………..जय गुरु रविदास , जय भीम.!!!!!!

Members of BRCF

R.B. ROZOTKAR
(National President)

KESHAV SALVI
(National Working President)

NITESH KELKAR
(National Vice President)

ASHOK JAISWAR
(National Organizer)

TILAKNATH JAISWAR
(National Treasurer)

AMOL WAGHMARE
( National Vice Treasurer)

MAHADEV SHEGAONKAR
(National General Secretary)

SUDAM DEVKULE
( National Vice Organizer)

SANJAY GHULE
(National Member)